"India-Cyprus Deal: साइप्रस से दोस्ती कर भारत ने कैसे उड़ा दी तुर्की और पाकिस्तान की नींद

 साइप्रस के राष्ट्रपति भारत आए, लेकिन नींद तुर्की और पाकिस्तान की क्यों उड़ गई?

हाल ही में दुनिया में प्रतिस्पर्धा और तनाव का माहौल बढ़ता जा रहा है। कहीं युद्ध चल रहे हैं तो कहीं देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। भारत भी इन सभी घटनाओं पर लगातार नज़र रख रहा है, क्योंकि पाकिस्तान और चीन उसकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ माने जाते हैं।

हाल के दिनों में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री चीन के दौरे पर गए थे, जहाँ उन्होंने कश्मीर का मुद्दा उठाया। भारत ने उनके इस प्रयास को सख्ती से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

चीन और पाकिस्तान के अलावा तुर्की भी अक्सर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है तथा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाता आया है। ऐसे में भारत को भी ऐसे सहयोगियों की आवश्यकता महसूस होती है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके हितों का समर्थन कर सकें और उसके पक्ष को मजबूती से रख सकें.

भारत साइप्रस संबंध 2026


इसी संदर्भ में साइप्रस एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभरकर सामने आया है। साइप्रस ने कई अवसरों पर भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की इच्छा जताई है और विभिन्न मुद्दों पर भारत का समर्थन भी किया है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है.

भारत साइप्रस संबंध 2026:-
हाल ही में साइप्रस के राष्ट्रपति जिनका नाम काफी बड़ा है, निकोस क्रिस्टोडौलिडेस भारत की यात्रा पर थे क्योंकि भारत साइप्रस की भौगोलिक स्थिति का समर्थन करता है और साइप्रस भी भारत में कश्मीर मुद्दे को आंतरिक मामला मानता है.


तुर्की और भारत का विवाद क्यों है

तुर्की हमेशा से पाकिस्तान का समर्थन करता आया है। वह मुस्लिम जगत में स्वयं को एक खलीफा जैसी नेतृत्वकारी शक्ति के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करता है। इसी कारण वह कश्मीर मुद्दे पर अक्सर पाकिस्तान के पक्ष का समर्थन करता है



भारत ने तुर्की को कैसे घेरा

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए भारत ने साइप्रस का समर्थन करने का निर्णय लिया, ताकि तुर्की के प्रभाव को संतुलित किया जा सके। भारत की विदेश नीति कभी भी किसी देश को परेशान करने या अनावश्यक टकराव पैदा करने की नहीं रही है। हालांकि, तुर्की लंबे समय से पाकिस्तान का समर्थन करता आया है। यही कारण है कि भारत ने साइप्रस को हथियार बेचने का फैसला किया। साइप्रस और तुर्की के बीच लंबे समय से एक बड़ा विवाद चला आ रहा है.


साइप्रस और तुर्की का विवाद क्या है?

इनका विवाद 1974 से चला आ रहा है। हालांकि, साइप्रस को ब्रिटेन से स्वतंत्रता 1960 में मिली थी। 1974 में ग्रीस समर्थित तख्तापलट के बाद तुर्की ने यह कहते हुए सैन्य हस्तक्षेप किया कि वह तुर्की मूल के साइप्रियोट समुदाय की रक्षा कर रहा है। इसके बाद तुर्की ने साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। तभी से तुर्की उस क्षेत्र को अलग इकाई के रूप में देखता है और उत्तरी साइप्रस का समर्थन करता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का अधिकांश हिस्सा पूरे साइप्रस द्वीप को रिपब्लिक ऑफ साइप्रस का ही हिस्सा मानता है.





FAQ Section


टिप्पणियाँ