The Impact of Global Economic Factors on the Indian Stock Market: A 2026 Outlook
Indian Stock Market: A 2026 Outlook इंडियन स्टॉक मार्केट पिछले 1 साल में बहुत ज्यादा भारी दबाव में था। उसका मुख्य कार…
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Dks जून 14, 2025nepal protests social media
जिस तरह से आंदोलन हुआ है वह अपने आप में एक कमाल का युवा शक्ति का प्रदर्शन है।
पहले के जमाने में यह कहा जाता था कि अगर युवा ठान ल तो कुछ भी कर सकता है और यह बात नेपाल के मामले में सही फिट होती है। दो ही दिन में K.P.Oli की सरकार को गिराने का जो काम नेपाल के युवाओं ने किया वह अपने आप में एक आदर्श प्रस्तुत करता है। लेकिन अब आगे क्या इसका सवाल का जवाब तो अब नेपाल की युवा ही देंगे।
शुरुआत होती है टेलीग्राम को बंद करने से, जब नेपाल की सरकार ने टेलीग्राम को बेन किया तो उन्होंने सोचा क्यों न जनता की आवाज को दबाने के लिए बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भी बन कर दिया जाए और यही हुआ। उन्होंने बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बंद कर दिया, लेकिन उन्होंने यह नहीं सोचा कि युवा इस कदर भड़क जाएगा कि उनकी सत्ता को साथ चुनौती देने के साथ-साथ उनकी जान पर यह बात आ जाएगी।
nepal protest reason
भ्रष्टाचार यह मुद्दा नेपाल में बहुत दिनों से चल रहा था। जिस तरह नेपाल में पैसा होते हुए भी वहां के नेता लोग अपनी जेब में भर रहे थे तो जनता का गुस्सा चरम पर था। लेकिन जनता अपने गुस्से को दबाए हुए थी। आखिर में यह गुस्सा एक ने एक दिन बाहर आना ही था। दो--------- महीने पहले ही इंडिया के एक पूर्व एजेंट ने भी इंटरव्यू में कहा था कि नेपाल में सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है और यह बात सही भी थी क्योंकि नेपाल की जनता तक चुकी थी। इस खोखले लोकतंत्र से जिसमें वह अपने बच्चों और परिवार और रिश्तेदारों का ही पेट भर रहे थे।
what is happening in nepal politics
अब नेपाल की राजनीतिक व्यवस्था में क्या होगा क्या वहां पर प्रचंड सरकार बनेगी क्या वहां पर राजशाही वापस आएगी? क्या वहां पर अब अस्तित्व होगी, यह देखना पड़ेगा। लेकिन इन सब में एक चीज कंफर्म है। वो यह है कि नेपाल अस्थिर हो गया है। अब इसे वापस स्थिर करने के लिए युवाओं को सबको मिलकर एक साथ एकता बनानी होगी।
अब इन सब में भारत सिर्फ देख रहा है। वह कुछ भी नहीं कर सकता। इसमें सोचने वाली बात यह है कि भारत इसमें कुछ भी क्यों नहीं कर सकता क्योंकि अगर भारत पॉजिटिव या नेगेटिव कुछ भी स्टेप उठना है तो इसमें अफवाह फैल सकती है और अफवाह फैलने का मतलब यह होगा। भारत और नेपाल के रिश्तों में दरार आ सकती है।
nepal protest news
हालांकि अगर नेपाल की सरकार जो भी बनती है या नेपाल के आर्मी जो भी मदद मांगती है तो भारत मना नहीं करेगा क्योंकि भारत और नेपाल के बीच में रोटी बेटी का संबंध है जो आज से नहीं सदियों पुराना है। चाहे इसमें चीन आ जाए, चाहे इसमें अमेरिका आ जाए। भारत और नेपाल के रिश्ते कभी खत्म नहीं हो सकते।
Next
अब नेपाल में हालात सामान्य है, लेकिन फिर भी एक राष्ट्र होने का ठीक नेपाल पर लग चुका है। अब यह अस्त्र राष्ट्र कब स्थिर होगा। यह तो नेपाल की युवा ही तय करेंगे जिन्होंने संसद को जला दिया जिन्होंने अपने इतिहास के नाम की निशानी सिंह दरबार को जला दिया जिन्होंने अपनी ही देश की सर्वोच्च की अदालत को जला दिया। अब वह युवा ही तय करेंगे कि उन्होंने गलत किया या सही।
India and Nepal....next process
Finally Nepal PM - Sushila karki G
अगर शेयर बाजार की बात करें तो 2025 तक भारत का शेयर बाजार 80000 को भी पार कर चुका है जो अपने आप में कमल की बात तो है, लेकिन यही शेयर बाजार 2023-24 में 86 हजार की एक काल्पनिक स्तर को भी पार कर गया था। लेकिन हाल ही के घटनाक्रम को देखें तो यूक्रेन और रूस युद्ध और ईरान और इजराइल का युद्ध।
इन सब विश्व स्तरीय घटनाओं की वजह से दुनिया भर के शेयर बाजारों पर विपरीत असर पड़ा है और साथ में भारत के बाजार भी घाटे हैं, लेकिन एक चीज देखने वाली है जितना उम्मीद लगाए गया था उतना भारत का शेयर बाजार नहीं घटा। आज भी यह 82 हजार के स्तर के पास पास जम रहा है जो 2025 तक का है।
Source:grow interface
भारतीय शेयर बाजार आगे 1 लाख तक के स्तर को पार कर सकते की क्षमता रखता है। फिलहाल सब कुछ अगर ठीक-ठाक रहा तो भारत का शेयर बाजार आने वाले एक दो वर्षों में 10 से 11 परसेंट तक का रिटर्न दे सकता है।
इन सब विश्व स्तरीय घटनाओं की वजह से दुनिया भर के शेयर बाजारों पर विपरीत असर पड़ा है और साथ में भारत के बाजार भी घाटे हैं, लेकिन एक चीज देखने वाली है जितना उम्मीद लगाए गया था उतना भारत का शेयर बाजार नहीं घटा। आज भी यह 82 हजार के स्तर के पास पास जम रहा है जो 2025 तक का है।
आरबीआई भारत के बैंकों का बैंक है जो अपने आप में एक सर्वोच्च संस्था के रूप में बैंकों की कार्य करती है।
February 2023 to February 2025, the repo rate Unchanged at 6.5% Since then, the Reserve Bank of India has Reduced the rate by a total of 1%, bringing it down to 5.5%.
आरबीआई भारत की अर्थव्यवस्था में पैसों के जो फ्लो है, लिक्विडिटी की प्रॉब्लम को सॉल्व करती है क्योंकि अगर आरबीआई बैंकों को ज्यादा उधार देगी तो महंगाई बढ़ जाएगी। काम उधार देगी तो विकास सर कम रहेगी तो इन सब के बीच में समान जिससे स्थापित करने का काम आरबीआई प्रमुख रूप से करती है।
और भारत सरकार के प्रमुख कमाई का स्रोत के रूप में भी आरबीआई एक बहुत बड़ा योगदान देती है क्योंकि आरबीआई जो लाभांश साल के अंत में देती है वह एक बड़ा अमाउंट होता है जिसे एक लाख करोड़ 86 हजार करोड़ इस तरह से बड़ा अमाउंट भारत सरकार को लाभांश के रूप में कमाकर देती है।
आरबीआई के प्रमुख कार्यों में एक कार्य यह भी है कि अगर कोई बैंक दिवालिया हो जाता है या को प्रबंधन के द्वारा उसमें आम आदमी का पैसा डूब जाता है तो आज भी 5 लाख तक का गारंटी प्रदान करती है। लेकिन हाल ही के वर्षों में यह 5 लाख का अमाउंट बढ़ाने की मांग उठ रही थी तो इसके तहत अब सरकार यानी 2025 के अंदर कुछ अमाउंट बढ़ाने की बात हो रही है। शायद यह अमाउंट पर 10 लाख तक हो।
जिस प्रकार शेयर बाजार में सेबी ध्यान रखना है, इस तरह से भारत की अर्थव्यवस्था में बैंकों की कार्य को प्रमुख रूप से देखने का काम आरबीआई करता है। आर्मी एक बहुत पुरानी संस्था है जो सन 1935 में स्थापित की गई थी। बाद में इसका राष्ट्रीयकरण किया गया और आज एक भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ माना जा सकता है।
rbi penalty south indian bank
आपने एक बात नोटिस की होगी भारत की पड़ोस में पाकिस्तान बांग्लादेश श्रीलंका म्यांमार इन देशों में अर्थव्यवस्था। बहुत ज्यादा गिर रही है। महंगाई बढ़ रही है। आर्थिक गतिविधियां संतुलन की स्थिति में, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। इसका प्रमुख कारण एक प्रमुख संस्था के रूप में आरबीआई जो काम कर रही है वह एक सराहनीय कार्य।
भारत का व्यापार घाटा जो पहले बहुत ज्यादा था वह अब आरबीआई के लाभांश ज्यादा देने की वजह से गिरकर 4% से भी नीचे आ गया है जो अपने आप में भारत की उन्नत अर्थव्यवस्था को दिखाता है।
central bank of india and rbi are same
आरबीआई एक स्वतंत्र संस्था है जिसका भारत सरकार पर नियंत्रण जैसा तो काम नहीं करती। भारत सरकार लेकिन सरकार को प्रमुख रूप से रिपोर्ट करती रहती है।
how many rbi banks are there in india
अभी के हाल ही के 2025 के घटनाक्रम को देखें तो जो बैंकों में आम आदमी की रिस्क राशि 5 लाख है। वो अगर बढ़ा देती है। आरबीआई तो आम आदमी को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। एक मिडिल फैमिली का आदमी 10 लख रुपए तक का गारंटी कर अगर पा लेता है तो उसके लिए बहुत ही बाद एक अचीवमेंट जैसा होगा।
Indian stock market - click here
rbi india interest rate
Rbi interest rate 5.5 till date jun2025
From February 2023 to February 2025, the repo rate Unchanged at 6.5% Since then, the Reserve Bank of India has Reduced the rate by a total of 1%, bringing it down to 5.5%.
मध्य पूर्व में गहराता तनाव, परमाणु चिंताएँ, आपूर्ति श्रृंखला संकट और शेयर बाज़ार का विश्लेषण
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व), जो हमेशा से ही अस्थिर रहा है, एक बार फिर गंभीर तनाव की चपेट में आ रहा है। दुनिया के तमाम देश अपने-अपने निजी हितों और फायदे के लिए क्षेत्रीय ताकतों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके कारण मिडिल ईस्ट की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है और आने वाले दिनों में कच्चे तेल (Crude Oil) व प्राकृतिक गैस की कीमतें तेजी से बढ़ने लगेंगी।
Source: The New York Times
ईरान और इजरायल दोनों ही देशों के साथ भारत के बेहद मजबूत और मित्रवत संबंध रहे हैं। इस वजह से भारत के लिए यह तय करना बेहद कठिन हो गया है कि वह किसका पक्ष ले और किसे सही ठहराए। हालांकि, इन सभी कूटनीतिक उलझनों के बीच एक बात पूरी तरह साफ और सच है—अब दुनिया भर में महंगाई तेजी से बढ़ेगी।
हमास और इजरायल का मामला बिल्कुल अलग था, लेकिन ईरान की स्थिति अलग है। ईरान बहुत जल्द एक परमाणु हथियार संपन्न देश बन सकता है। उसके पास स्पष्ट परमाणु क्षमता है, इसलिए इजरायल और ईरान के बीच एक सीधा और भीषण युद्ध पूरे विश्व के लिए अत्यंत चिंता का विषय है। अब हमें सोमवार को बाजार खुलने का इंतजार करना होगा कि वैश्विक शेयर बाजार (Global Market) किस स्तर तक गिरता है।
इजरायल ने जिस तरह ईरान पर सटीक हमले किए, उससे यह पूरी तरह एक सोची-समझी और योजनाबद्ध सैन्य कार्रवाई दिखाई देती है। लेकिन जब ईरान ने पलटवार किया, तो वह हमला भी बेहद घातक और शक्तिशाली था। इससे पूरी दुनिया की चिंता बढ़ गई है क्योंकि न तो ईरान पीछे हटने को तैयार है और न ही इजरायल। यह पूरे विश्व के लिए एक बेहद गंभीर संकट है, क्योंकि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होगी और महंगाई हर देश के आम नागरिक पर असर डालेगी।
हालिया घटनाक्रम को देखते हुए, ईरान के पलटवार के बाद इजरायल ने चेतावनी दी है कि वह अब ईरान पर ऐसा चौतरफा हमला करेगा जो उसकी कमर तोड़ देगा। यदि ऐसा होता है, तो पूरी दुनिया में अफरा-तफरी का माहौल बन जाएगा। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है, जिस पर ईरान का सीधा नियंत्रण है। यदि यह समुद्री मार्ग प्रभावित होता है, तो वैश्विक लॉजिस्टिक्स और शिपिंग भाड़ा दोगुना हो सकता है।
अब देखना यह होगा कि आगे स्थिति क्या मोड़ लेती है, क्योंकि अमेरिका झुकने को तैयार नहीं है और इजरायल पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा। इसमें सबसे बड़ा आर्थिक व सैन्य नुकसान ईरान का ही होगा, जो खुद को एक क्षेत्रीय सुपरपावर के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा था। इतने दिनों के लंबे संघर्ष में ईरान आर्थिक रूप से पूरी तरह कमजोर हो जाएगा। भले ही चीन का समर्थन ईरान के साथ हो, लेकिन चीन भी अमेरिका और पश्चिमी प्रतिबंधों के डर से सीधी सैन्य मदद नहीं दे पाएगा।
इस युद्ध के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में अनिश्चितता का डर फैल गया है। जब भी मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है, निवेशक अपने पैसे को शेयर बाजार और जोखिम भरे संपत्तियों से निकालकर सोने (Gold) और अमेरिकी डॉलर जैसी सुरक्षित जगहों पर लगाने लगते हैं। यही कारण है कि आने वाले दिनों में सोने के भाव नए रिकॉर्ड स्तर को छू सकते हैं।
इसके अलावा, भारत जैसे विकासशील देशों के लिए, जो अपनी आवश्यकता का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करते हैं, यह संकट चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को बढ़ा सकता है। यदि क्रूड ऑयल $90 या $100 प्रति बैरल पार करता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और दैनिक उपभोग की वस्तुएं (फूड प्रोडक्ट्स और एफएमसीजी) सीधी महंगी हो जाएंगी।
अंततः, इस युद्ध और विनाश के माहौल में पूरी दुनिया की भलाई इसी में है कि दोनों देश और अंतर्राष्ट्रीय संगठन (जैसे संयुक्त राष्ट्र) टेबल पर बैठकर शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए कोई बीच का रास्ता निकालें। युद्ध कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता, यह केवल मानवीय त्रास और आर्थिक तबाही ही लाता है।
Date 15.6.2025
Prev close 81118.60(-0.70%)
The issue going on between Israel and Iran in Central Asia is not just on the brink of war but has become a part of the war.
Meanwhile, if we talk about the Indian stock market, then nothing special is seen due to the 2-day holiday, but tomorrow i.e. on Monday, as soon as the market opens, something big will definitely happen because the way the oil prices are rising, the prices of natural gas will fall.
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| Indian economy and stock market |
This will put a lot of pressure on the stock market and it can be expected that there will be a lot of upheaval in the market.
Israel and Iran tensions- Click here
मध्य पूर्व में गहराता तनाव, परमाणु चिंताएँ, आपूर्ति श्रृंखला संकट और शेयर बाज़ार का विश्लेषण
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व), जो हमेशा से ही अस्थिर रहा है, एक बार फिर गंभीर तनाव की चपेट में आ रहा है। दुनिया के तमाम देश अपने-अपने निजी हितों और फायदे के लिए क्षेत्रीय ताकतों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके कारण मिडिल ईस्ट की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है और आने वाले दिनों में कच्चे तेल (Crude Oil) व प्राकृतिक गैस की कीमतें तेजी से बढ़ने लगेंगी।
Source: The New York Times
ईरान और इजरायल दोनों ही देशों के साथ भारत के बेहद मजबूत और मित्रवत संबंध रहे हैं। इस वजह से भारत के लिए यह तय करना बेहद कठिन हो गया है कि वह किसका पक्ष ले और किसे सही ठहराए। हालांकि, इन सभी कूटनीतिक उलझनों के बीच एक बात पूरी तरह साफ और सच है—अब दुनिया भर में महंगाई तेजी से बढ़ेगी।
हमास और इजरायल का मामला बिल्कुल अलग था, लेकिन ईरान की स्थिति अलग है। ईरान बहुत जल्द एक परमाणु हथियार संपन्न देश बन सकता है। उसके पास स्पष्ट परमाणु क्षमता है, इसलिए इजरायल और ईरान के बीच एक सीधा और भीषण युद्ध पूरे विश्व के लिए अत्यंत चिंता का विषय है। अब हमें सोमवार को बाजार खुलने का इंतजार करना होगा कि वैश्विक शेयर बाजार (Global Market) किस स्तर तक गिरता है।
इजरायल ने जिस तरह ईरान पर सटीक हमले किए, उससे यह पूरी तरह एक सोची-समझी और योजनाबद्ध सैन्य कार्रवाई दिखाई देती है। लेकिन जब ईरान ने पलटवार किया, तो वह हमला भी बेहद घातक और शक्तिशाली था। इससे पूरी दुनिया की चिंता बढ़ गई है क्योंकि न तो ईरान पीछे हटने को तैयार है और न ही इजरायल। यह पूरे विश्व के लिए एक बेहद गंभीर संकट है, क्योंकि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होगी और महंगाई हर देश के आम नागरिक पर असर डालेगी।
हालिया घटनाक्रम को देखते हुए, ईरान के पलटवार के बाद इजरायल ने चेतावनी दी है कि वह अब ईरान पर ऐसा चौतरफा हमला करेगा जो उसकी कमर तोड़ देगा। यदि ऐसा होता है, तो पूरी दुनिया में अफरा-तफरी का माहौल बन जाएगा। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है, जिस पर ईरान का सीधा नियंत्रण है। यदि यह समुद्री मार्ग प्रभावित होता है, तो वैश्विक लॉजिस्टिक्स और शिपिंग भाड़ा दोगुना हो सकता है।
अब देखना यह होगा कि आगे स्थिति क्या मोड़ लेती है, क्योंकि अमेरिका झुकने को तैयार नहीं है और इजरायल पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा। इसमें सबसे बड़ा आर्थिक व सैन्य नुकसान ईरान का ही होगा, जो खुद को एक क्षेत्रीय सुपरपावर के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा था। इतने दिनों के लंबे संघर्ष में ईरान आर्थिक रूप से पूरी तरह कमजोर हो जाएगा। भले ही चीन का समर्थन ईरान के साथ हो, लेकिन चीन भी अमेरिका और पश्चिमी प्रतिबंधों के डर से सीधी सैन्य मदद नहीं दे पाएगा।
इस युद्ध के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में अनिश्चितता का डर फैल गया है। जब भी मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है, निवेशक अपने पैसे को शेयर बाजार और जोखिम भरे संपत्तियों से निकालकर सोने (Gold) और अमेरिकी डॉलर जैसी सुरक्षित जगहों पर लगाने लगते हैं। यही कारण है कि आने वाले दिनों में सोने के भाव नए रिकॉर्ड स्तर को छू सकते हैं।
इसके अलावा, भारत जैसे विकासशील देशों के लिए, जो अपनी आवश्यकता का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करते हैं, यह संकट चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को बढ़ा सकता है। यदि क्रूड ऑयल $90 या $100 प्रति बैरल पार करता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और दैनिक उपभोग की वस्तुएं (फूड प्रोडक्ट्स और एफएमसीजी) सीधी महंगी हो जाएंगी।
अंततः, इस युद्ध और विनाश के माहौल में पूरी दुनिया की भलाई इसी में है कि दोनों देश और अंतर्राष्ट्रीय संगठन (जैसे संयुक्त राष्ट्र) टेबल पर बैठकर शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए कोई बीच का रास्ता निकालें। युद्ध कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता, यह केवल मानवीय त्रास और आर्थिक तबाही ही लाता है।